
पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी के जनà¥à¤®à¤¶à¤¤à¥€ वरà¥à¤· 1980 में डॉ राम नारायण शà¥à¤•à¥à¤² दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लमही में वृहदॠकारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® किया गया था

31 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी के जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤µà¤¸ के रूप में मनाया जाता है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ समय में कोविड-19 जैसी महामारी से बहà¥à¤¤ सी बाधतायें हैं लेकिन बहà¥à¤¤ से लोग अपने-अपने तरीके से पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी को याद कर रहे हैं। 40 वरà¥à¤¤ पूरà¥à¤µ 11 जनू 1980-81 पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी का जनà¥à¤®à¤¶à¤¤à¥€ वरà¥à¤· था। डॉ राम नारायण शà¥à¤•à¥à¤² के संयोजन में पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी के गांव लमही में तीन दिवसीय समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ हà¥à¤† था।
11 जून 1980 के दिन वृहद कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® हà¥à¤† जो पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ था, जिसमें गोषà¥à¤ ी, चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€, कवि समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨, नाटक का कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® हà¥à¤† था। यह वरà¥à¤· पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जनà¥à¤®à¤¶à¤¤à¥€ वरà¥à¤· à¤à¥€ था। गोषà¥à¤ ी में राम नारायण शà¥à¤•à¥à¤² ने पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द की विरासत' पर à¤à¤• निबंध पढ़ा था। पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी की जहाठमूरà¥à¤¤à¤¿ लगी है इस पà¥à¤°à¤¾à¤‚गण में पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी के सोदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ को उदà¥à¤§à¤°à¤£ को आकरà¥à¤·à¤• à¤à¤µà¤‚ सà¥à¤‚दर अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ में तखà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर अंकित थे। तथा पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द की कहानियों के विविध पà¥à¤°à¤¸à¤‚गो पर चितà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° व पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ पतà¥à¤°à¤•à¤¾à¤° सà¥à¤¶à¥€à¤² तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¤¾à¤ ी जी मधॠअरोड़ा जी के चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ लगाई गई थी।
इसी दिन सायंकाल कवि समà¥à¤®à¥‡à¤²à¤¨ हà¥à¤† था जिसका संचालन डॉ अवधेश पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ ने किया था। इसके पशà¥à¤šà¤¾à¤¤, पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द की अमर कृति गोदान पर गोरखपà¥à¤° के कलाकारों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ नाटक की पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ की गई थी।
डॉ राम नारायण शà¥à¤•à¥à¤² ने 31जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ 1984 में 'लमही चलो' का आयोजन किया था जिसमें त छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ गणमानà¥à¤¯ लोगों की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ में लमही पहà¥à¤‚चे थे और पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द की चरà¥à¤šà¤¿à¤¤ कहानी सदà¥à¤—ति का नाटà¥à¤¯ रूप पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया था। आज 31 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ जो पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जी का जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤µà¤¸ है।
40 वरà¥à¤· पूरà¥à¤µ उनके गाà¤à¤µ जो आज अब शहर का रूप ले रहा है। डॉ शà¥à¤•à¥à¤² ने 1980 में उनके जनà¥à¤®à¤¶à¤¤à¥€ वरà¥à¤· के रूप में à¤à¤• वृहद व सफल कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® करवाये थे जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आज के दिन हम उस कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द जयंती पर याद कर रहे हैं।